सियाह  रात का रंग  खूब निखरता रहे ! 
बादलों के आगोश से चाँद निकलता रहे !!

रातों का गुजरना,शमा का जलना उससे पूछो !
तमाम रात जो करवट बदलता रहे !!

रहने दो आबाद मैखाना घर के किसी कोने मे!
थोड़ी सी  पी के दिल-ऐ-बेताब संभलता रहे !!

हर मुकाम ज़िन्दगी का पड़ाव भर है !
मंजिल पे पोहोचूं तो नया रस्ता निकलता रहे !!
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