खामोशियों को आजमा के देखते हैं !
कुछ अनसुनी सुना के देखते  हैं     !!

किनारों पे खड़े हो के देखूं अक्स मिरा !
चलो ,तुम्हें समन्दर  बना के देखते हैं !!

तन्हाई भी महकाती है ज़िन्दगी को क्या !
तमाम दीवानों कि महफ़िल सजा के देखते हैं !!

सायों का क़द बहुत बढ़ गया है अब !
चलो  दीये घर के जला के देखते हैं  !!








Text selection Lock by Hindi Blog Tips