अपने नक़ाब सारे हैं |


देखो ऐसे जैसे   दिखतें  बेनक़ाब  सारे हैं । 
सबके अपने राज़ ,अपने नक़ाब सारे हैं   ॥ 

कभी आवाज़ पे अपनी खामोश रहता हूँ । 
बिना मिले भी खुद से दुआ  सलाम सारे हैं ॥ 

निभा सके न कोई वादा, खुद से ,फ़क़त शाम तक ।  
मै… तुम…वो.… क्या कहूँ बईमान  सारे हैं ॥ 

खोल दो खिड़कियाँ लम्हो की,कुछ ताज़ी हवा आने दो । 
मुद्दत से पड़े बंद  , ....... …… ये मकान सारे  हैं  ॥ 







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