घनी छायादार शज़र सा लगता है !
ये मुकाम मुझे अपने शहर सा लगता है !!
कच्ची गुनगुनी धूप सा एक किस्सा !
सर्द जाड़ों में दोपहर सा लगता है !!
उड़ा ले गयी हवा जिन्हें साथ अपने !
उन बादलों का बरसना बेअसर सा लगता है !!
गर भरम है मेरा तो भरम ही सही !
रिश्तों को अजमाने में डर सा लगता है !!
तन्हाई के कुछ और ढब सीख लूँ !
महफिलों में रहना तो हुनर सा लगता है !!


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