कुछ बेमानी से क़रार हैं
ये इशक़ के कारोबार हैं !
बात करने का हुनर दिलों को जीत लेता है
यूँ ख़ामोशी मे भी'......... लफ्ज़ बेशुमार हैं !
खुद में झांक के खुद को संवार ले
हर शख्स आइने में गिरिफ़्तार है !
नफरतों के तूफ़ान में जो घिर जाती है
वो कश्तियाँ साहिल से दरकिनार हैं !
कोई तोड़ नहीं तिलस्म का उनके
कितने सादादिल,,,,,,,,, अय्यार हैं !

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