आज फिर एक सोच को आवाज़ दी है !
सोचा बहुत की लिख दूँ,फिर बात टाल दी है !!
बैठे थे गुमसुम चुपचाप किसी कोने में !
ख्यालों के पंछियों को नन्ही सी परवाज़ दी है !!
तन्हा हो के भी तन्हा नहीं था उनमें !
जिन तनहाइयों को मैंने अपनी सुबहो शाम दी है !!
ताउम्र रहे बरकरार, मुस्कान मासूम बचपन की !
जिसकी हंसी ने हर खलिश बाँट दी है !!
बेअसर रहे जाम -ओ -पैमाना सारे !
के तिश्नगी मैंने यूँ बेहिसाब पी है !!
बेखुदी ,बेचैनी और बेसुकुनी !
फितरत मेरी मुझ पे एक इलज़ाम सी है !!
एक दिए पर कब तक.... तूफां का क़हर रहेगा !
वक़्त आएगा इसकी लो से रोशन तेरा घर रहेगा !!
खामियां बहुत हैं..... जीत पाऊं इनसे तो बात बने !
तो अब शुरू मेरा..............मुझसे ये समर रहेगा !!
चढ़ आता है ................ख्यालों का सूरज हर रात !
सुकून-ए- छावं की खातिर,घनी यादों का शज़र रहेगा !!
खूब वाकिफ है ..............वफा-ओ-राह से तेरी लेकिन !
जानकर भी हाल तेरा ,.........ज़ालिम वो बेख़बर रहेगा !!
शिद्दत-ए-आशनाई ..........आदत सी बन गयी है यानि !
अब ताउम्र जारी........................तनहा ये सफ़र रहेगा !!
क्यूँ भिगोती हैं ......................दश्त-ए-रुखसार मेरे !
एक अज़ाब है ये भी ,कब तक इन आँखों मैं समंदर रहेगा !!
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