एक दिए पर कब तक.... तूफां का क़हर रहेगा !
वक़्त आएगा इसकी लो से रोशन तेरा घर रहेगा !!

खामियां बहुत हैं..... जीत पाऊं इनसे तो बात बने !
तो अब शुरू मेरा..............मुझसे ये समर रहेगा !!

चढ़ आता है ................ख्यालों का सूरज हर रात !
सुकून-ए- छावं की खातिर,घनी यादों का शज़र रहेगा !!

खूब वाकिफ है ..............वफा-ओ-राह से तेरी लेकिन !
जानकर भी हाल तेरा ,.........ज़ालिम वो बेख़बर रहेगा !!

शिद्दत-ए-आशनाई ..........आदत सी बन गयी है यानि !
अब ताउम्र जारी........................तनहा ये सफ़र रहेगा !!

क्यूँ भिगोती हैं ......................दश्त-ए-रुखसार मेरे !
एक अज़ाब है ये भी ,कब तक इन आँखों मैं समंदर रहेगा !!

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