बात फुर्सत की थी फुरकत पे आके ठहरी...
बस चूक हुई जहाँ ज़ीस्त उस मुकाम पे ठहरी!!

भूख ने गरीब को किया हैरान इस कदर
हैरत नहीं के उनकी नज़र तवे की आंचपे ठहरी!!

इस सबा मे मेरी सदा का असर आता नहीं तुझ तक...
तू आसमान मे मै ज़मीन पर जो ठहरी!!

मन हुआ दोडू, भागू,पकड़ के छू लूँ तुमको..
मेरे नज़र जब बच्चों के मैदान पे ठहरी!!

गज़ब हाल था उस रोज़ इस दिल का..
जिस रोज़ तेरी उंगलियाँ मेरे रुखसार पे ठहरी!!

furkat-saparation

zist-लाइफ

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